नई दिल्ली: दिल्ली में 3 बड़ी घटनाएं हुई हैं। सीलमपुर में बदमाशों ने सर्राफा व्यापारी से लूट की वारदात को अंजाम दिया है, वहीं आईपी स्टेट इलाके में दिल्ली पुलिस और बदमाश के बीच एनकाउंटर हुआ है, जिसमें अजय कालिया नाम का बदमाश पकड़ा गया है। तीसरा मामला ये है कि दिल्ली पुलिस की साइबर टीम ने बड़े ऑनलाइन इन्वेस्टमेंट फ्रॉड रैकेट का पर्दाफाश किया है।
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सीलमपुर में क्या घटना हुई?
दिल्ली के सीलमपुर इलाके में बदमाशों ने सर्राफा व्यापारी से डेढ़ किलो सोना लूट लिया। बदमाश, चांदनी चौक के सर्राफा व्यापारी से डेढ़ किलो सोना लूटकर फरार हो गए। जब सर्राफा व्यापारी चांदनी चौक से अपने घर शाहदरा जा रहे थे, उस समय बदमाशों ने लूट को अंजाम दिया।
सर्राफा व्यापारी की पहचान प्रथम बंसल के रूप में हुई है। उन्हीं से बदमाशों ने डेढ़ करोड़ की सोने की लूट की है। दिल्ली पुलिस मामले की जांच में जुटी है।
आईपी स्टेट में क्या घटना हुई?
दिल्ली के आईपी स्टेट इलाके में दिल्ली पुलिस और बदमाशों के बीच एनकाउंटर हुआ है। एनकाउंटर के बाद पुलिस ने हत्या और लूट के आरोपी को पकड़ लिया है। एनकाउंटर के दौरान कई राउंड गोलियां भी चली हैं। बदमाश के पैर में गोली लगी है। गिरफ्तार हुए बदमाश का नाम अजय कालिया है।
अजय कालिया वांछित अपराधी था और कई वारदातों में शामिल था।
ऑनलाइन इन्वेस्टमेंट फ्रॉड रैकेट का पर्दाफाश, 11 साइबर ठग भी गिरफ्तार
दिल्ली से एक और मामला ये भी है कि दिल्ली पुलिस के साउथ-वेस्ट जिले की साइबर थाना टीम ने एक बड़े ऑनलाइन इन्वेस्टमेंट फ्रॉड रैकेट का पर्दाफाश करते हुए 11 साइबर ठगों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह दिल्ली और मुंबई से मिलकर काम कर रहा था और लोगों को निवेश पर भारी मुनाफे का लालच देकर ठगी करता था।
पुलिस के मुताबिक इस गैंग ने एक 60 साल के वरिष्ठ नागरिक को फेसबुक पर फर्जी विज्ञापन दिखाकर अपने जाल में फंसाया और उनसे 22.67 लाख की ठगी कर ली। मामले की जांच के लिए साइबर थाना पुलिस ने एक विशेष टीम बनाई। डिजिटल डाटा, कॉल डिटेल और मनी ट्रेल की जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि रोहिणी और नेताजी सुभाष प्लेस में इस गैंग का नेटवर्क चल रहा है।
पुलिस ने दोनों जगह छापेमारी कर तजिंदर सिंह उर्फ लकी, आशीष सैनी, शिव दयाल सिंह, शिवा और गिरिराज किशोर को गिरफ्तार कर लिया। जांच में सामने आया कि NSP में इन लोगों ने फर्जी ऑफिस बना रखा था, जहां से नकली बैंक खाते खोलकर उन्हें साइबर ठगों को सप्लाई किया जाता था।
पूछताछ में यह भी सामने आया कि ठगी की रकम कई खातों से होते हुए मुंबई के एक बैंक खाते में पहुंचती थी। इसके बाद पुलिस ने राजस्थान के बिजाई नगर (ब्यावर) में छापेमारी कर रामदेव सांगला, प्रवीण कुमावत, दीपक मेवाड़ा और त्रिलोक चंद नायक को भी गिरफ्तार किया। ये लोग फर्जी बैंक खाते जुटाकर उन्हें मुंबई में बैठे PK नाम के व्यक्ति को देते थे, जिसके जरिए ठगी की रकम को आगे ट्रांसफर किया जाता था। पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि यह गिरोह कंबोडिया में बैठे साइबर ठगों के लिए भारत में बैंक खातों का इंतजाम करता था, जिनके जरिए ठगी की रकम घुमाई जाती थी।